കവിത
जो आप हि कर सकती है
दिल में बसी कठिनाई को कोन सुलझाया ? , दिल मे बसी कठिनाई को कौन सुलझाया ? जो मेरे माँ हि कर सकती है।
आँखों से निकली आँसू को कोन पौंचा
?
अरे, आँखों से निकली आँसू को कोन पाँच ? जो मेरे माँ हि कर सकती है।
जब खिर पड़े, हाँ जब स्लिट पड़े
‘
कोन मेरे दर्द को अपने आँचल में चुपाया ? जैसे मेरे माँ हिं कर सकती है।
हाँ सब कुछ मेरे माँ ही कर सकती है, मेरे लिए। माँ मुझे आपकी ममता कि आँचल मे बसावी, मुझे आपकी खोद में बिठाबों
माँ मुझे आपकी पवित्र मन से हिम्मत जो आप ही कर सकते हैं।.
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